विजयादशमी!
"विजयादशमी" फेंक दो तम की मटमैली चादर, खुशियों की भर लाओ गागर! विजय सूर्य के स्वागत पथ पर, उंडेल दो अमृत कलश भर-भर! शुक्ल-दशमी का सुनहरा सूरज, आश्विन मास में खिले नव पं...
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