GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyमहंगाई की मार, आम आदमी बेजारडस गई है नागिन, मची चीख-पुकार।महंगाई की मार, आम आदमी बेजार।।अन्नदाता के पीठ पर, पड़ी कोड़ों की मार।हालात के आगे, कृषक ने मानी हार।। कोविड की महामारी, कर गई प्रहार।प्रकृति से छेड़खानी, छीन गई बहार।।म...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें