सुबह की सैर
राग पुष्प सुंदर मय धरतीनव पत कोमल प्रकाशित करतीशीतलहर के आ जाने से ओस की बूंदे श्रृंगारित करती...मोती सा बूंदों का घेराभोर हुयी फिर हुआ सबेराओझल होते दृश्य मधुर कोमानस पटल पर है उकेरा...शीतलता नय...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े