दाम्पत्य जीवन..
दाम्पत्य जीवन की पराकाष्ठा यहीं कि जी रहे है हम! शीशे के बिखरें टुकड़ों को समेट अश्क़ पी रहे है हम! चाँद-सितारों की महफ़िल में अँधेरे निगल रहे है हम! कतरा-कतरा रोशनी के लिए मर-मर जी रह...
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