GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyसफर(जीवन का)तन जला, मन जलाऔर ये जीवन जला,जीवन की इस अंधेरी राह मेंमैं चला और तू चला,खोकर स्वयं के मर्म कोचलने लगा ये सिलसिला,रह गए अकेले इस डगर में न मैं मिला न तू मिला,डूब गये थे इस भंवर में तो लगने लग...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Kapil TiwariThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें