सफर(जीवन का)
तन जला, मन जलाऔर ये जीवन जला,जीवन की इस अंधेरी राह मेंमैं चला और तू चला,खोकर स्वयं के मर्म कोचलने लगा ये सिलसिला,रह गए अकेले इस डगर में न मैं मिला न तू मिला,डूब गये थे इस भंवर में तो लगने लग...
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