GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyसृष्टि...नमन माँ शारदे🙏🙏चौपाई छन्दकल-कल बहते झरने चंचल।हिमआच्छादित पर्वत अंचल।बादल चूमे निश दिन अम्बर।सृष्टि अचंभित होती क्षण भर।।प्राची देखे कुंकुम मल-मल।सुबह-हृदय में फैली हलचल।भौरें करते गुंजन पल-पल।खिलती...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें