GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyदादी का कान्हा!भगवान जी! दादी से मेरी कट्टी है!आप से मेरी बट्टी है!वो कहती है,मुन्ना! तू कान्हा का रूप है!' झूठ मूठ बहलाती है...सर्दियों में भी, ठंडे पानी से नहलाती है!पल्लू से पोंछ कर...फटे कपड़े पहन...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें