दादी का कान्हा!
भगवान जी! दादी से मेरी कट्टी है!आप से मेरी बट्टी है!वो कहती है,मुन्ना! तू कान्हा का रूप है!' झूठ मूठ बहलाती है...सर्दियों में भी, ठंडे पानी से नहलाती है!पल्लू से पोंछ कर...फटे कपड़े पहन...
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