GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyमाँ!रुण झुण, रुण झुण करती मैया, आओ जी।भक्तों के जीवन में खुशियाँ, लाओ जी।महिषासुर संहारक दर्शन, ध्याओ जी।लूर-लूर जाता अमिजल घट, पाओ जी।।ममता की माँ शीतल छाया, पाई है।दीन-दुखी पर तेरी माया, स्थाई है।नित्य ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें