माँ!
रुण झुण, रुण झुण करती मैया, आओ जी।भक्तों के जीवन में खुशियाँ, लाओ जी।महिषासुर संहारक दर्शन, ध्याओ जी।लूर-लूर जाता अमिजल घट, पाओ जी।।ममता की माँ शीतल छाया, पाई है।दीन-दुखी पर तेरी माया, स्थाई है।नित्य ...
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