GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyभावांजलि...कुण्डलिया छंद आधारित रचना ।रतनजड़ित हैं यामिनी, पुलकित होगी भोर।।मौन हुई स्वर स्वामिनी, चली मोक्ष की ऒर।चली मोक्ष की ऒर, छोड़ जग में अँधियारा।चली चिरंतन देश, छोड़ अब वतन हमारा।मातु भारती शान, बहुत है त...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें