भावांजलि...
कुण्डलिया छंद आधारित रचना ।रतनजड़ित हैं यामिनी, पुलकित होगी भोर।।मौन हुई स्वर स्वामिनी, चली मोक्ष की ऒर।चली मोक्ष की ऒर, छोड़ जग में अँधियारा।चली चिरंतन देश, छोड़ अब वतन हमारा।मातु भारती शान, बहुत है त...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े