GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify कमल-कुसुम...उजालों का प्रण लिए, रात भर जलता रहा दीया, स्नेह रीता-रीता, झेलता रहा दुनिया की दुश्वारियां! आँधियों से अकेला, लड़ता-झगड़ता रहा, उम्र भर, दीये तले तम के सायें ता-...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें