कमल-कुसुम...
उजालों का प्रण लिए, रात भर जलता रहा दीया, स्नेह रीता-रीता, झेलता रहा दुनिया की दुश्वारियां! आँधियों से अकेला, लड़ता-झगड़ता रहा, उम्र भर, दीये तले तम के सायें ता-...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े