गुरू बिन...
शीर्षक़ : गुरू बिन... गुरु बिन कहाँ मिले है सिद्धि?सुवर्ण तपा चमकायें जो बुद्धि! निद्रा के अधीन जो अज्ञानी,गुरु ही जगाये सुना ईश-वाणी!गुरु करे जागृत अवचेतन मन,अमृत वाणी, ब्रह्म...
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