छंद!
माँ शारदे को नमन!द्विगुणित सुंदर छंद /मुक्तकमात्रा भार : 12 12 पदान्त:  दो गुरु:*ले त्रिशूल हाथों में, करती व्याघ्र सवारी।खल संहारक देती, सजा शस्त्र से भारीममता की है ढाणी, हो तुम मात दुलारी।रसमय...
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