GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyछंद!माँ शारदे को नमन!द्विगुणित सुंदर छंद /मुक्तकमात्रा भार : 12 12 पदान्त: दो गुरु:*ले त्रिशूल हाथों में, करती व्याघ्र सवारी।खल संहारक देती, सजा शस्त्र से भारीममता की है ढाणी, हो तुम मात दुलारी।रसमय...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें