GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyचाय की तलबचाय की तलबतलब हैं चाय की, ठिठुरती ठंड में,आस, गरम चाय मिले कुल्हड में,साथ में पिया सजना हो हमारे,महकेगी चाय, हो लज्जत चाय में।।चाय के साथ खिले प्रेम, संजीदगी,इलायची सुरभित चाय दे ताजगी,बढाता सामीप्य, ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें