ये प्यार ही तो ज़िंदगी... भाग ८
भाग ८आज भोर में ही वैदेही की नींद खुल गई थी! कितने दिनों बाद खिड़की से सूर्योदय को देख कर उसका मन प्रफुल्लित हो गया..उसने रजाई को समेट कर तकिये के उपर रक्खा और हवाई चप्पल पहन वह आँगन में चहल-कदमी करने ...
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