अरे मूढ़मति
अरे मुढ़मति, बुद्धि की गागर भर।जीवन को स्थितप्रज्ञ रत्नाकर कर।।सुख-दुख जीवन-नैया के दो चप्पू।कर्म यज्ञ रख जारी,  मत बन रे गप्पू।।मनुज जन्म दुर्लभ मनु कर भव पार।चुनौतियों से हौसला कभी मत हार।।अरे म...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े