चौकलेट
जीवन उतार-चढ़ाव में न हो कभी खटास,काजु-किसमिस-चौकलेट की हो मिठास!रिश्ते पे न हो कभी छल-कपट का मुल्लमा,स्फटिक सा मन, विश्वास-समर्पण हो बलमा!स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई 
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