पितृ पक्ष पर संवेदनाएँ!
जाण पूर्वजों की कृपा, सदा मान उपकार।कैसे लौटाएं उन्हें, अनुपम सुख उपहार।।तर्पण पितरों का करों, मोक्ष-मुक्ति का द्वार।पिंडदान कर तृप्ति दूँ, आत्मा शान्ति अपार।।आस अधूरी क्यों रहे, क्यों भटके बिन चैन।क्...
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