GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyपितृ पक्ष पर संवेदनाएँ!जाण पूर्वजों की कृपा, सदा मान उपकार।कैसे लौटाएं उन्हें, अनुपम सुख उपहार।।तर्पण पितरों का करों, मोक्ष-मुक्ति का द्वार।पिंडदान कर तृप्ति दूँ, आत्मा शान्ति अपार।।आस अधूरी क्यों रहे, क्यों भटके बिन चैन।क्...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें