GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify राम...राम बसे मोरे मन मंदिर में जैसे दूध-शहद ! राम छवि मोरे मन दर्पण में जैसे पूनम-शरद! कौशल्यासुत जन्मे अवध में, बजे ढोल-शहनाई! सखी-सहेलियाँ ले बलैया, गायें मंगल गीत-बधाई! ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें