राम...
राम बसे मोरे मन मंदिर में जैसे दूध-शहद ! राम छवि मोरे मन दर्पण में जैसे पूनम-शरद! कौशल्यासुत जन्मे अवध में, बजे ढोल-शहनाई! सखी-सहेलियाँ ले बलैया, गायें मंगल गीत-बधाई! ...
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