GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyनारी, तू नारायणी! (प्रतियोगिता)शीर्षक : नि:शब्द पीड़!शाल-श्रीफल, तमगों-तोहफों का, खुमार बाकी है।मय जो चढ़ी शोहरत की , उतरनी अभी बाकी है।ढलते सूरज संग 'नारी-सम्मान' अंधकार में गुम है।'ढाक के तीन पात' सा शोषण, उत्पीड़न, गुमसुम है।...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें