नारी, तू नारायणी! (प्रतियोगिता)
शीर्षक : नि:शब्द पीड़!शाल-श्रीफल, तमगों-तोहफों का, खुमार बाकी है।मय जो चढ़ी शोहरत की , उतरनी अभी बाकी है।ढलते सूरज संग 'नारी-सम्मान' अंधकार में गुम है।'ढाक के तीन पात' सा शोषण, उत्पीड़न, गुमसुम है।...
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