दोहे
दोहे!माली सींचे बाग को, मोती निपजे जाण |देखा भूखा पूत को, हलधर निकले प्राण ||1||हलधर के घर धान हो, दूध, दही का जोग |आँगन गैया, श्वान हो, घर में छप्पन भोग ||2||घर कुबेर के अंगना, दीवाली की धूम |लक्ष्मी...
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