पाती!
कमलदल पर लिख-लिख भेजू पाती यौवन की!निर्मोही! प्रेम में ठुकराना मत अर्जी जीवन की!आँगन की मुरझायी तुलसी,जूही कड़ी धूप में झूलसी!आँसू बहा रहा पारिजात,बाँट जोह रहीं विरहनी दिन-रात!पंखुडियों पर लिख-लिख भेजू...
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