GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyपाती!कमलदल पर लिख-लिख भेजू पाती यौवन की!निर्मोही! प्रेम में ठुकराना मत अर्जी जीवन की!आँगन की मुरझायी तुलसी,जूही कड़ी धूप में झूलसी!आँसू बहा रहा पारिजात,बाँट जोह रहीं विरहनी दिन-रात!पंखुडियों पर लिख-लिख भेजू...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें