उम्मीद!
शिक्षा-दीक्षा, सेवा-चिकित्सा,जुड़ जाएं सिक्कों की लिप्सा।सेवा बने स्वार्थ-पूर्ति साधन।दर-दर ठोकरें खाता निर्धन।।बैसाखी आरक्षण की थाम कर,जाति आरक्षित कोटे के दम पर,मतिमंद जब बन जाएं डॉक्टर!मेरिट वाले कत...
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