यादों का बवंडर.
यादों के बवंडर से निकल गए होते...गर खुशबु तेरी फ़िजा में घुली होती!मौजों के थपेडों को निगल गए होते...आबरू वफ़ा की साँसों में घुली होती!क्यों डोलती रही वक़्त के झूलों पर?आफ़ताब रोशनी में नहा गया होता!जहाँ ...
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