GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyहँसगति छंदहँसगति छंद :मात्रा भार 4 4 2 1 3 2 4 शीर्षक : कर्म योग! धर्म-कर्म का योग, कठिन है यारों। जिद्दी बन दो भोग, अटल पथ प्यारों। मानव भव संजोग, भाग्य अति भारी। सन्त चरण को पूज, सि...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें