GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyलहू के दो रंग लहू के दो रंग ✍️ Vijay Sharma Erry (1) वक़्त बदल गया, इंसान भी बदल गए, चेहरों पे मुस्कान, पर दिलों में जल गए। जहाँ फ़ायदा दिखा, वहाँ प्यार के संग, जहाँ मतलब नहीं, वहाँ लहू का रंग भंग। (2) लाल लहू वहाँ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Vijay SharmaThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें