GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyघनाक्षरी छंदघनाक्षरी छंदनेता गुनगुना रहें,गली-गली घूम रहे,नोटों की उछाल हैं,गौर फरमाइए।।एक दूजे की धुलाई, हो रही टांग खिंचाई, तू-तू मैं-मैं की तूती,वादें आप पाइए।।धरा पर आये तारें,उजले दोगुले सारें,श्वा...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें