GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyसफर जिंदगी काफोटो प्रतियोगिताथक गये हैं पांव साथ चलते-चलते,सूरज हुआ मद्धम शाम ढलते-ढलते,पलभर ले लो विश्राम दूर है मंजिल,कट जायेगा सफर बातें करते-करते।।स्वरचित मौलिक रचनाकारचंचल जैनLabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें