GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyकल की चिंता छोड़..नमन मंचदिनांक १४-१०-२०२५विषय:कल की चिंता छोड़ विधा: दोहे कल की चिंता छोड़ दो,रखो आज का मान।कल की चिंता में भला,क्यों खोता तू आन।।कल की चिंता में मृषा,बोझा ढोये व्यर्थ।होना होगा होयगा, वो सत ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा अशोक दोषीThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें