कल की चिंता छोड़..
नमन मंचदिनांक १४-१०-२०२५विषय:कल की चिंता छोड़ विधा: दोहे कल की चिंता छोड़ दो,रखो आज का मान।कल की चिंता में भला,क्यों खोता तू आन।।कल की चिंता में मृषा,बोझा ढोये व्यर्थ।होना होगा होयगा, वो सत ...
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