क्या चेतना मृत हो चुकी?
क्या चेतना मृत हो चुकी है सभ्य समाज की? क्या मन-मस्तिष्क बन गया पाषाण मनुज का? क्या चैतन्यविहीन हो जाता ह्रदय, देख अत्याचार को? क्या रुधिर नहीं उबलता देख नारी-उत्पीड़न-...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े