पक्षिणी!
भटक रही थी उपवन-उपवन,नन्ही चिड़िया भोली।कहीं सजे थे फूल-पत्ते,कहीं हरी-भरी थी डाली।।दुविधा में थी नन्ही पक्षिणी, कहाँ सजाऊं बसेरा।विशाल वृक्ष की डाली झेले,आँधी-तूफान घणेरा।।तिनका-तिनका जोड़ चिड़िया,...
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