GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyपक्षिणी!भटक रही थी उपवन-उपवन,नन्ही चिड़िया भोली।कहीं सजे थे फूल-पत्ते,कहीं हरी-भरी थी डाली।।दुविधा में थी नन्ही पक्षिणी, कहाँ सजाऊं बसेरा।विशाल वृक्ष की डाली झेले,आँधी-तूफान घणेरा।।तिनका-तिनका जोड़ चिड़िया,...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें