GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyनव वर्ष का जश्न!भूल कर कजरारी रात सखी,अरुणोदय का स्वप्न सजाए!प्राची के गुलाबी गालों पर,अधरों के अमीट निशान बनाएँ!भीगी पलको में ठहरे मोती ,अतीत के गुल्लक में भर आएँ!तन्हा लम्हें, चुभती अनकही बातें,छोड़ आओ पीछे गुजरे वक़...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें