नव वर्ष का जश्न!
भूल कर कजरारी रात सखी,अरुणोदय का स्वप्न सजाए!प्राची के गुलाबी गालों पर,अधरों के अमीट निशान बनाएँ!भीगी पलको में ठहरे मोती ,अतीत के गुल्लक में भर आएँ!तन्हा लम्हें, चुभती अनकही बातें,छोड़ आओ पीछे गुजरे वक़...
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