GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyआज करूं मैं आरती तेरीकरूं आज मैं आरती तेरीधर के घृत मन दीपतेरे चरणों में शीश झुकाऊं,-2रख मोहे चरण समीपहे जी रे मैनें -२नत ननौं में ,नेह लिया संजोए है जी रे प्रभु , दर्श दीवाना तेरा तुझमें गया हूँ खोए...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा अशोक दोषीThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें