अनेकता में एकता
प्रतियोगिता देशप्रेम बहे प्रेम धारा'अनेकता में एकता, बहे प्रेम धारा, 'सत्यमेव जयते' हैं सिद्धांत हमारा,बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय,'वसुधैव कुटुम्बकं' सद्भाव हमारा।। चंचल जैन
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े