GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyसफर अकेला पर मैं टूटी नहीं“ज़िंदगी इतनी मुश्किल होगी, कभी सोचा ना था,किसी ने हाथ थामा… और कितनों ने बीच राह छोड़ा, ये भी सोचा ना था।सोचा था साथ हमेशा रहेगा,पर ये वक़्त भी बदल जाएगा, ये भी सोचा ना था।रात है तो क्या हुआ, सुबह तो...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Diya JaisinghaniThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें