GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyफिर शुरू की है उठ के अपनी जिंदगानी फिर शुरू की हैआज से अपनी कहानी फिर शुरू की हैफिर से अपना ये कदम मैंने बढ़ाया हैएक तीर को फिर चाप पर मैंने चढ़ाया हैफिर से लक्ष्य पर मेरी निगाहें अड़ गई है अबइसको बेध जाने की ललक भी...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Vikram KumarThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें