मुखौटे..
अपनाओ वहीं जो सर्वथा हो सही,दिल की सुनू या दिमाग़ की कही?क्यों पचड़े में पडू क्या हैं गलत-सहीकरुँ वही जो दिमाग़ का न करें दही!ज़िन्दगी हैं ऊपरवाले का उपहार,तर्क-वितर्क में जाया क्यों हो बहार? मन का क...
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