GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyमुखौटे..अपनाओ वहीं जो सर्वथा हो सही,दिल की सुनू या दिमाग़ की कही?क्यों पचड़े में पडू क्या हैं गलत-सहीकरुँ वही जो दिमाग़ का न करें दही!ज़िन्दगी हैं ऊपरवाले का उपहार,तर्क-वितर्क में जाया क्यों हो बहार? मन का क...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें