GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyजीवन का गणित विधा: व्यंग्यात्मक छंद मुक्त काव्य शीर्षक: काश! इंसान इंसान नहीं..काश ! इंसान इंसान नहीं कोई सुंदर पंछी यानी परिंदा होता तो कितना अच्छा होता !!कौन लगाया यह #जीवन का...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा अशोक दोषीThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें