जीवन का गणित
विधा: व्यंग्यात्मक छंद मुक्त काव्य शीर्षक: काश! इंसान इंसान नहीं..काश ! इंसान इंसान नहीं  कोई सुंदर पंछी यानी परिंदा होता तो कितना अच्छा होता !!कौन लगाया यह #जीवन का...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े