क्या करूँ!
चल रहे वर्षों से हैं जिसके लिए वो दूर कितने जिंदगी के छोर हैं,सीधा रहे तो तेज थोड़ा चल सकूँ इस रास्ते में और कितने मोड़ हैं, सुनता हूँ सब भागते थक जाते हैं मैं थक रहा हूँ चाल धीमी चल...
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