GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyलौ आलोकितपहरा देते सीमा पर, शूर वीरसैनिक चौकस।भारत माँ के वे रक्षक, सर्दी हो या हो पावस।।धूप ठंड हो कंप प्रलय, राष्ट्र प्रेम लौ आलोकित।भारत माता की जय-जय, विजय गान चहुँ दिशि गूंजित।।स्वरचित मौलिक रचना चंच...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें