लौ आलोकित
पहरा देते सीमा पर, शूर वीरसैनिक चौकस।भारत माँ के वे रक्षक, सर्दी हो या हो पावस।।धूप ठंड हो कंप प्रलय, राष्ट्र प्रेम लौ आलोकित।भारत माता की जय-जय, विजय गान चहुँ दिशि गूंजित।।स्वरचित मौलिक रचना चंच...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े