ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. भाग ६५
भाग ६५मोबाइल के अलार्म से विभा उठ चुकी थी। साढ़े छ: बजे वज्र के यहाँ पहुंचना था। विभा ने खिड़की से बाहर झांका। चन्द्रमा अभी भी भोर का इंतज़ार कर रहा था। प्राची की मुस्कुराहट ने जैसे ही लाल-केसरियां फूलों...
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