GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify ज़िन्दगी का लहराता आँचल.... जिंदगी का लहराता आँचल, कस के पकड़ लूँ … फ़िसल न जाये हसीं लम्हा, बाँहों में जखड़ लूँ .... तूफान में उम्मीदों की कश्ती, दरिया को थमा दूँ .... बादलों से लुकाछुपी खेल, इन्द्रधनु सजा दू...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें