आम आदमी और नेता!
नहीं योग्यता चाहिए, ऐसा सेवा धर्म।बढियाँ है नेतागिरी, पूर्ण समय का कर्म।।कुर्सी चालीसा पढ़े, ज्ञानी बहुजन आज।जनता की सुनते नहीं, भानरहित है काज।।जब चुनाव है सामने, सजता है बाज़ार।झूठे वादे दे सदा, करता ...
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