एकांत!
कैसे एक एकांत से जन्मामिलता है भवसागर से,जैसे बारिश की बूंद यहांमिलती है महासागर से! जुड़ते है अपनों से रिश्तेबंधन अटूट कहलाते है,जाने और अंजाने में हमस्वयं से खो जाते है! खोने-पाने की चाहत ...
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