GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyमतगयन्द सवैया!मत्तगयन्द सवैया: तारक है अरिहंत जिनेश्वर ,भैरव देव करें रखवारी।साधक आतम काज सुधारक,भूतल पावन तारणहारी।।संगम तीरथ तीरण तारण,संबल-कंबल जो मनु धारी।शीतल स्नेहिल रूप हरे दुख,पांच नमो पद उन्नत भारी।दे...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें