GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyवादा..कैसे कहूं मन की बातें,शब्दों से परे मुलाकाते!सुहाने दिन, महकती राते! वो चाँद का छेड़ना आते-जाते!कैसे भूलूं वो हसीन वादें,चांदनी रात में भीगी-भीगी यादें!होंठ सिले-सिले, वो मीठी फरियादें,वो साथ जीने...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें