वादा..
कैसे कहूं मन की बातें,शब्दों से परे मुलाकाते!सुहाने दिन, महकती राते! वो चाँद का छेड़ना आते-जाते!कैसे भूलूं वो हसीन वादें,चांदनी रात में भीगी-भीगी यादें!होंठ सिले-सिले, वो मीठी फरियादें,वो साथ जीने...
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