GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyसाकी! तेरे मयखाने में...साकी! तेरे मयखाने में … जिंदगी से सुलह कर ली!रिश्ते-नातों को दफ़न कर .... तेरी बाँहों में पनाह ले ली!दुनियाँ के अंधेरों में … जब साएँ भी दगा दे गएँ .... साकी! तेरे मयखान...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें