दोहावली
दोहावलीप्राची से ले लालिमा, आयी हौले भोर।सृष्टि रूप मोहिनी सा, पंछी करते शोर।।बरसे बादल जोर से, नाचे वन में मोर।बूंद बूंद मोती झरे, होवे जिया विभोर।।डाल डाल जब डोलती, करे पुष्प बौछार।झूले पेडों पर पडे...
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