माया-मोह
माया-मोह के बन्धन में, सपनों का संसार।क्रोध-अहम् की आँधी, भड़का रही अंगार।।स्वार्थ-दम्भ के सायों से, रिश्तों को लगा ग्रहण।शिकवे-गिलों की होड़ में, नेह का हुआ क्षरण।।दो प्रेमी दिलों के बिच, दो ध्रुवों के...
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