कृष्ण दीवानी!
लाल-केसरिया रंग उछालती, आई मतवाली, चंचल शाम! अबीर, ग़ुलाल से रंगी चुनर, शरमाई राधा देख श्याम! अस्ताचल का रक्तिम सूरज, छुपा झुरमट के उस पार, अधरों पर ठहरी लोक-लाज अधीर मन की तकरार! कजरारे कान्ह...
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