GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyगुरुपुष्यामृत जब गुरुपुष्यामृत योग आया। सुवर्ण आभ से मन ललचाया।। छोटासा बटुआ लेकर इतराती। चली मन ही मन मुस्कुराती।। लेने है मुझे झुमके सुंदर। हीरे जडित अंगुठी बेहतर।। नवलखा हार भी ले ही ल...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें