गुरुपुष्यामृत
  जब गुरुपुष्यामृत योग आया। सुवर्ण आभ से मन ललचाया।। छोटासा बटुआ लेकर इतराती।  चली मन ही मन मुस्कुराती।।   लेने है मुझे झुमके सुंदर। हीरे जडित अंगुठी बेहतर।।   नवलखा हार भी ले ही ल...
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